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मां द्वारा किया बुरा व्यवहार नवजात शिशु के मस्तिष्क को करता है प्रभावित, जानें कैसे….

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नई दिल्ली :   शोधकर्ताओं ने पाया कि माताओं द्वारा दुर्व्यवहार किये जाने के कारण नवजात चूहों में मस्तिष्क क्षति की सीमा पाई गयी जो माता पिता द्वारा किये जाने वाले दुर्व्यवहार के कारण होने वाले मनोवैज्ञानिक परिणामों की प्रक्रिया को समझने में सहायक है। पीएनएएस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि किस प्रकार माता पिता द्वारा किया गया दुर्व्यवहार बच्चों में तनाव के अलावा अन्य व्यावहारिक समस्याएं पैदा कर सकता है।जहां पूर्व अध्ययनों से पता चला था कि माता पिता द्वारा दुर्व्यवहार किये जाने के कारण चूहों के ब्रेन (मस्तिष्क) के कुछ हिस्सों जैसे अमिगडाला और हिप्पोकैंपस में संकुचन आ गया था।

मस्तिष्क के ये हिस्से डर और मेमोरी (याददाश्त) को संसाधित करते हैं। वर्तमान शोध ने यह पता लगाया है कि यह किस प्रकार उनके बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करता है। यूएस की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (एनवाययू), लंगोने हेल्थ के शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि दुर्व्यवहार के कारण होने वाला तनाव हिप्पोकैंपस को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी था जबकि तनाव के साथ साथ माता द्वारा किया जाने वाला दुर्व्यवहार अमिगडाला के विकास को बाधित करने के लिए आवश्यक था जिससे उसके बच्चे अस्वाभाविक रूप से दूर रहें और वे एक साथ सीमित समय बिताएं।

वैज्ञानिकों ने चूहे के उन पिल्लों के सामाजिक व्यवहार और मस्तिष्क का विश्लेषण किया जिनके साथ एक सप्ताह तक उनकी माताओं ने दुर्व्यवहार किया और उसकी तुलना चूहे के बच्चों के अन्य तीन समूहों से की जो: वह समूह जिसे तनाव उत्प्रेरक दवाओं से इंजेक्ट किया गया जब वे परवरिश करने वाली मां के साथ थे, चूहे के बच्चों का वह समूह जो असंवेदनकृत मां के साथ थे जो मातृ व्यवहार नहीं दिखाती थी तथा वह समूह जो एक वस्तु के साथ रहते थे।शोधकर्ताओं ने चूहे के बच्चों को घर में मिलने वाली पर्याप्त सामग्री उपलब्ध न करवाकर प्रेरित किया जो चूहों की नई मां आमतौर पर जंगल में अपने बच्चों के लिए प्राप्त कर लेती है – यह चूहों में दुर्व्यवहार उत्पन्न करने की एक सामान्य पद्धति है।

अध्ययन के परिणामों से पता चला कि वे चूहे जिनके साथ दुर्व्यवहार हुआ था वे अपनी मां या नर्स के साथ रहने में संकोच कर रहे थे और ऐसा उन्होंने बहुत कम समय के लिए किया कि उनकी मां जाग रही है या नहीं। इन प्रभावों को दोहराया गया जब शोधकर्ताओं ने तनाव हार्मोन कोर्टिकोस्टेरोन चूहे के उन बच्चों में इंजेक्ट किया जिनके साथ दुर्व्यवहार नहीं हुआ था। शोधकर्ताओं के अनुसार दुर्व्यवहार से होने वाले नकारात्मक प्रभाव को शिशु के मस्तिष्क में तनाव हार्मोन की क्रिया को रासायनिक तरीके से अवरुद्ध करके और तनावयुक्त चूहों को दुर्व्यवहार न करने वाली माताओं के साथ रखकर कम किया जा सकता है।एनवाययू लंगोने हेल्थ के सहलेखक रिजायना एम सुलिवन ने बताया कि “माएं तथा देखभाल करने वाले अन्य लोगों की शिशु के मस्तिष्क तक विशिष्ट पहुंच होती है और यदि लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार होता रहे तो इससे स्थायी नुकसान हो सकता है।

सुलिवन ने यह भी बताया कि माताएं या सरोगेट्स में अच्छी तरह से पालन पोषण करके इस नुकसान को कम करने की क्षमता होती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने कहा कि परिणामों से देखभाल करने वालों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है जिन्होंने अपने बच्चे को कई बार तनाव दिया है। सुलिवन के अनुसार बच्चे के मस्तिष्क को स्थायी तौर पर नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ अलग अलग तनावपूर्ण घटनाएं लगती हैं। उन्होंने बताया कि स्वस्थ रूप से मस्तिष्क का विकास होने के लिए कुछ स्तर के तनाव हार्मोन्स की आवश्यकता होती है।

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