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वास्‍तु के अनुसार उत्तर दिशा में सिर रखकर नहीं चाहिए सोना, जानिए इससे जुड़ा वैज्ञान‍िक कारण

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नई दिल्ली : स्‍वस्‍थ बनें रहने के ल‍िए नींद बहुत जरुरी होती है। एक अच्‍छी नींद न सिर्फ दिमाग को स्‍वस्‍थ रखती है बल्कि शरीर को भी ऊर्जावान बनाएं रखती हैं। हमें तकरीबन रोजाना 7-8 घंटे सोना जरुरी होता है तभी हम हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल जीते हैं। सिर्फ सोने के घंटे ही नहीं बल्कि सोने की पोजिशन भी हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए बहुत जरुरी होते हैं। भारतीय परिवारों में सोने की द‍िशा पर खूब ध्‍यान द‍िया जाता है। अक्‍सर घर के बड़े-बूढ़े ये बात दोहराते हैं कि दक्षिण दिशा में पैर ना करके सोना। यह एक सलाह है जिसे हर भारतीय परिवार में बुज़ुर्ग ज़रूर देते हैं।

आयुर्वेद में भी इस बारे में बताया गया है। वास्तु शास्त के मुताबिक उत्तर दिशा में सिर ना रख कर सोना चाहिए। इसके पीछे एक उचित कारण भी बताया गया है। साइंस के सिद्धांतों के आधार पर यह सही साबित होता है। दरअसल सौरमंडल की चुम्बकीय तरंगे, दक्षिण से उत्तर दिशा में की तरफ गमन करती हैं। जब हम उत्तर दिशा में सिर करके सोते हैं, तो ये तरंगे सिर से होते हुए पैरों की तरफ गुज़र जाती हैं।

यह प्रक्रिया पाचन तंत्र के साथ सेहत लिए अच्छी मानी जाती हैं। लेकिन जब कोई व्यक्ति दक्षिण दिशा में पैर करके सोता है, तो इन तरंगों का उल्टा प्रभाव पड़ता है। दक्षिण दिशा में पैर रख कर सोने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। उत्तर दिशा में सिर रख कर सोना स्लीप क्वालिटी को भी प्रभावित करती है। स्लीपिंग डिसऑडर्स की एक बड़ी वजह स्लीपिंग पोजिशन्स ही हैं। साथ ही बुरे सपने आने की भी बड़ी वजह दक्षिण की ओर पैर रख कर सोना माना जाता है। इसीलिए अगर आप शांत और गहरी नींद सोना चाहते हैं, तो दक्षिण की तरफ पैर ना रखें।

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